inspiring stories in hindi for success-part 3

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Inspirational short stories about life in hindi for success

inspiring hindi Story-1

inspiring stories in hindi for success

एक गांव में एक आदमी सुबह सुबह तालाब की ओर मछली पकड़ने की झाल लेकर निकल पड़ा था।

तालाब के पास पहुंचने पर उसे एहसास हुआ कि अभी प्रकाश पूरा फैला नही है।

थोड़ी देर मस्त वातावरण में इधर उधर टहलता रहा।

अचानक उसका पैर एक बड़े झोले से टकराया।

आश्चर्य से उसने उस में हाथ डाला तो उसे पता चला कि झोले में

एक से बढ़कर एक चमकदार पत्थर थे। अंधेरा होने की वजह से उसे तो कुछ पता नहीं था बस टाइम पास करने के लिए उसने उसमें से एक के बाद एक पत्थर नदी में फेंकना शुरू कर दिया।

थोड़ी देर में उसने झोला लगभग खाली कर दिया।

जब आखरी एक पत्थर बचा था तब पूरा सवेरा हो चुका था।

सुबह के उजाले में उसने पाया कि अंतिम पत्थर जो उनके हाथ में था वह बहुत ही चमकीला था।

पत्थर के चमकीले पन को बस देखते ही रह गया। वह कोई मामूली पत्थर नहीं था बल्कि अमूल्य हीरा था।

जब उसे मालूम हुआ कि तालाब में अब तक उसने जिसको पत्थर समझ कर फेंक दिया वह सारे के सारे अनमोल हीरे थे तब वह  चीख चीख कर रोने लगा।

 वह बार-बार अपने हाथ में पकड़े हुए अंतिम हीरा जिसको वह पत्थर समझ रहा था उसके लिए व अंधेरे को दोष दे रहा था।

तालाब के किनारे दुखी होकर बैठ गया तभी उस वक्त वहां से एक साधु निकले।

उसके पास से सारी हकीकत जानने पर साधु ने उसे कहा अरे इसमें रोने की क्या बात है? तेरा सब कुछ कहा लूट गया है?

तू तेरी जात को नसीबदार समझ क्योंकि तेरा बहुत बड़ा नसीब है कि आखरी हीरा फेंकने से पहले ही उजाला हो गया वरना ये हीरा भी तेरे हाथों से जाने ही वाला था।

इस मूल्यवान हीरे की कीमत तुझे पता है? इस एक हीरे से भी तेरी जिंदगी का नक्शा बदल सकता है।

अब जो तेरे बस की बात नहीं है उस पर चीखने चिल्लाने से क्या फायदा अब जो तेरे हाथ में है उसकी खुशी तुझे मनानी चाहिए।

साधु की बात सुनकर उसका मन कुछ हल्का हुआ वह प्रसन्न चित्त से घर वापस आ गया।

Moral: दोस्तो, जो बीत गया सो बीत गया। जो बात हमारे बस की नहीं है उस पर शोक मनाने से हमारे हाथ में क्या आएगा?

लेकिन जो भी हमारे पास है उसको हमें लाइफ में सेलिब्रेट करना सीखना चाहिए। हरिवंश राय बच्चन की प्रसिद्ध काव्य पंक्ति है।

inspiring stories in hindi for success

 

जो बीत गई सो बात गई

 

जीवन में एक सितारा था

माना वह बेहद प्यारा था

वह डूब गया तो डूब गया

अम्बर के आनन को देखो

कितने इसके तारे टूटे

कितने इसके प्यारे छूटे

जो छूट गए फिर कहाँ मिले

पर बोलो टूटे तारों पर

कब अम्बर शोक मनाता है

जो बीत गई सो बात गई। इस बात को हमें जिंदगी भर याद रखना चाहिए।

Motivational story in hindi for success-part 1

inspiring hindi Story-2

एक सोसायटी में बहुत ही नेक दिल एक इंसान रहता था। बहुत ही परिश्रमी और प्रामाणिक था।

जो भी उसके संपर्क में आता था वह सभी लोग उसके अच्छे व्यवहार से बहुत खुश हो जाते थे और उसकी दिल खोलकर तारीफ करते थे।

एक दिन वह अपने ऑफिस से घर लौट रहा था उस वक्त उसने रास्ते में अपने मोहल्ले के कुछ लोगों को गपशप करते सुना।

ध्यान से सुनने पर उसे पता चला के वे लोग उसके बारे में ही बातें कर रहे थे।

अब उससे रहा नहीं गया उसको लगा के यह लोग निश्चित ही उसकी तारीफ करते होगे चुपचाप वह उन लोगों के पीछे जाने लगा, लेकिन जब उसे पता चला कि यह लोग तो प्रशंसा करने की जगह उसकी बुराई कर रहे थे|

कोई कहता था यह इंसान तो बहुत ही अभिमानी है। तो कोई बोल रहा था कि यह तो अंदर से कुछ और बाहर से कुछ और है। कुछ लोग उसे ढोंगी बता रहे थे।

तो कुछ लोग सिर्फ दिखावा कह रहे थे।

यह सारी बातें सुनकर उस इंसान के दिल पर बहुत गहरी चोट लगी। क्योंकि आज तक उसने अपने बारे में ऐसा कभी नहीं सुना था।

उसका दिमाग सुन्न हो गया था। जहां भी जाता और किसी को बातें करते देखता तो उसे दाल में कुछ काला ही नजर आता था।

उसके दिमाग में एक ग्रंथि बंध गई थी के लोग उसके बारे में

बुरा सोच रहे हैं, बुरा बोल रहे हैं।

ऐसी नकारात्मक सोच का असर ऐसा पड़ा कि कभी-कभी तो जब उसकी प्रशंसा की जाती थी तब भी उसे ऐसा ही लगता था कि लोग उनकी मजाक उड़ा रहे हैं।

अब ऐसी सोच की वजह से आसपास के सभी लोगों को ऐसे लगने लगा कि मोहन में कुछ बड़ा परिवर्तन आ गया है और उसकी वाइफ भी अपने पति के ऐसे बदलाव से बहुत आश्चर्य में थी।

एक बार उसने उसे पूछा आप इतने बदले बदले से क्यों लग रहे हो क्या इसकी वजह मैं जान सकती हूं?

उसने उदास मन से जो कुछ भी हुआ था वह सब बता दिया।

पत्नी ने कई देर तक सोचा और बाद में उसे याद आया कि शहर में एक प्रेरणात्मक सेमिनार होने वाला था। वहां पर एक से बढ़कर एक वक्ता आने वाले थे।

उसने अपने पति को इस सेमिनार के बारे में बताया और कहा कि यह सेमिनार हमें जरूर अटेंड करना चाहिए हमारी समस्या का कुछ ना कुछ हल निकल आएगा।

दूसरे दिन वे सेमिनार में पहुंचे।

कार्यक्रम के दौरान इस इंसान ने अपनी बात वक्ता के सामने रखी।

उसने बताया कि अब लोग पहले जैसे नहीं रहे सभी लोग मेरे

बारे में गलत सोचते हैं। मैं अब अच्छा इंसान नहीं रहा। आप बताइए मुझे कि पहले की तरह मैं अपनी क्रेडिट कैसे प्राप्त कर सकता हूं?

वक्ता को पूरी बात समझ में आ चुकी थी।

उसने उसको पास के एक गांव की शिविर में भेजा… और कहा कि आप वहीं पर रात के समय ठहरना।

उसने सारी रात शिविर में बिताई दूसरे दिन जब वक्ता से बात हुई तो वक्ता ने उससे पूछा आप की रात कैसे गुजरी?

तब उस इंसान ने कहा कि रात को जब मैं सोने जा रहा था अचानक ही शिविर के पास के तालाब में से कई सारे मेंढक की कर्कश आवाज आ रही थी।

रात के समय मेंढकोने  इतना हो हल्ला मचा रखा था कि मैं पूरी रात सो भी नहीं पाया।

मुझे इस बात का आश्चर्य हो रहा है कि इतने  कोलाहल में गांव के लोग कैसे सो पाते हैं?

तभी वक्ता बोला, अब हो भी क्या सकता है? क्या आप से कुछ होगा?

उसने कहा इतना कोलाहल सुनने पर तो लगता है कि मेंढको की संख्या एक दो नहीं लेकिन हजारों में होगी।

मैं जितने हो सके उतने मजदूरों को लेकर कल आता हूं और सभी मेंढकोको पकड़कर दूर नदी में छोड़ा आता हू।

अगले दिन वह इंसान कई सारे मजदूरों को लेकर वहां आ गया था और वह वक्ता अभी खड़े खड़े यह सब कुछ देख रहा था।

छोटे से तालाब में सब मजदूरों ने मिलकर जाल डालकर मेंढ़को को पकड़ना शुरू किया। देखते ही देखते कई सारे मेंढक पकड़ लिए गए।

जब उस इंसान ने देखा के ज्यादा से ज्यादा 90- 100 मेंढक ही पकड़े गए हैं तो वह बोला कि कल रात तो इस तालाब में हजारों की संख्या में मेंढक थे।

रात के समय सारे के सारे कहां चले गए? और बस इतने ही बचे हैं?

अब वक्ता ने उसे समझाते हुए कहा, सभी मेंढक यहीं के यहीं है।

तुमने कल यही सारे मेंढको की ध्वनि सुनी थी।

यह सारे मिलकर इतना हो हल्ला मचा रहे थे कि तुम्हें इसकी संख्या हजारों में लगी।

अब आप ध्यान से समझो इसी प्रकार जब तुम अपने आसपास के कुछ ही लोगों को अपने बारे में भला बुरा बोलते सुना तो तुम भी

बहुत बड़ी गलती कर बैठे। तुम्हें ऐसा लगने लगा कि जो कोई भी तुम्हारे संपर्क में आ रहा है वह हर आदमी तुम्हारे बारे में गलत सोच रहा है, गलत बोल रहा है।

अब जो लोग ऐसा बोल रहे थे उसकी संख्या इस  मेंढकोकी संख्या जितनी ही थी।

अब अगली बार किसी को अपने बारे में भला बुरा बोलते सुनो तो इतना ध्यान में रखना  हो सकता है कि बहुत थोड़ी संख्या में लोग आपके बारे में ऐसा बोल रहे हो।

और हां एक बात और चाहे तुम कितने भी अच्छे इंसान क्यों ना हो समाज में कोई तो ऐसा होगा ही जो तुम्हारी बुराई करेगा ही करेगा।

अब उस इंसान की आंखें खुल चुकी वह फिर से अपने पुराने व्यक्तित्व की तरफ लौट जाने की एक नई दिशा उसे मिल गयी थी|

Moral:  दोस्तों हमें भी इस इंसान की तरह हमारे आस पास के और समाज के कुछ लोगों के व्यवहार को सभी लोगों से नहीं जोड़ना चाहिए। एक हिंदी फिल्म के गाने की बहुत ही असरदार पंक्तियां है…….

.कुछ तो लोग कहेंगे

लोगों का काम है कहना

छोड़ो बेकार की बातों में                  inspiring stories in hindi for success

कहीं बीत ना जाये रैना

कुछ तो लोग कहेंगे

 

कुछ रीत जगत की ऐसी है

हर एक सुबह की शाम हुई

कुछ रीत जगत की ऐसी है

हर एक सुबह की शाम हुई

तू कौन है तेरा नाम है क्या

सीता भी यहाँ बदनाम हुई

फिर क्यों संसार की बातों से

भीग गए तेरे नैना।

जीवन में यह बात हमेशा याद रखना दोस्तों हम जो हैं वह हम हैं जो लोग कह रहे हैं वह हम नहीं।

Inspirational short stories about life in hindi-part 2

inspiring hindi Story-3

एक बार एक आदमी बैंक में पैसे निकालने गया। बैंक में बहुत भीड़ थी जब उसकी बारी आई तो बैंक के कैशियर में औसत पेमेंट कर दी।

वह आदमी पैसों को थैले में रखकर वहां से चल दिया उसने करीब 200000 रुपए बैंक से निकाले थे। लेकिन बैंक के कैशियर ने गलती से उसे 210000₹ दे दिए थे।

लेकिन उसने ऐसा जताया के उसको कुछ पता ही नहीं है और पैसे चुपचाप अपने पास रख लिए।

उसके दिमाग में कई तरह के विचार आ रहे थे। उसने सोचा कि इसमें मेरा क्या दोष है फिर उसके मन में आया क्यों उसे यह पैसे लौटा देना चाहिए।

लेकिन फिर से विचार बदला उसने सोचा यदि मैं गलती करके किसी को ज्यादा पैसे दे देता हूं तो मुझे भला कोई लौटाएगा?

बार बार उसके मन के ख्याल बदलते रहे थोड़ी देर ऐसा ख्याल आता था कि पैसे लौटा दे लेकिन हर बार दिमाग में से कोई ना कोई नई चीज बाहर निकल कर आती थी।

पैसे वापस ना देने के हजार बहाने मिलते थे।

लेकिन हर इंसान के अंदर सिर्फ शैतानी दिमाग ही नहीं होता लेकिन अपने दिल की आवाज भी होती है।

रुक रुक कर उसके दिल में से आवाज आ रही थी? क्या ऐसा करना ठीक है?

दूसरे की गलती का फायदा उठाकर खुद बेईमान ना होने का दिखावा करते हो क्या यही तुम्हारी इंसानियत है?

उसके दिल और दिमाग के बीच कशमकश कई देर तक चली।

अचानक उसने थैले में से ₹10000 निकाल लिए और बैंक की ओर प्रस्थान किया।

अब उसका  बेचैन मन शांत होने लगा था चेहरे पर प्रसन्नता के भाव थे। वह अपने आप को एक वैचारिक बीमारी से मुक्त पाया हुआ समझता था।

उसके चेहरे पर इतनी प्रसन्नता थी मानो उसने कोई बड़ी जंग जीत ली हो।

बैंक पहुंचकर देखा तो कैशियर थोड़ी चिंता में दिख रहा था।

जब इस आदमी ने उसको ₹10000 वापस लौटाए तब जाकर

कैशियर ने चैन की सांस ली।

अपनी जेब से 500 का एक नोट निकाल कर उसने उसके हाथ में थमा या और कहा अरे भाई आप तो बहुत बड़े नेक दिल इंसान हो।

आज मेरी तरफ से आपके बच्चों को कुछ मिठाई खिला देना।

मेहरबानी करके ना मत बोलना।

तब उस आदमी ने कहा के आभार आप को नहीं मुझे आपका व्यक्त करना चाहिए…. और मैं आपको मुंह मीठा कराऊंगा।

बैंक के कैशियर ने आश्चर्य से पूछा अरे भाई, आप किस वजह से ऐसा कर रहे हो?

तब उस आदमी ने कहा मैं इस बात के लिए आपका आभारी हूं कि यह ₹10000 ने मुझे अपने अंदर झांकने का मौका दिया।

आज मेरे दिल और दिमाग की परीक्षा हुई। आपकी गलती ने मुझे जीवन का सबसे बड़ा गुण सिखाया।

आज मेरी अंदर बुराई पर अच्छाई की जीत हुई… और यह सब आपकी वजह से हुआ इसलिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया।          inspiring stories in hindi for success

Moral-

दोस्तो, समाज में दो तरह के लोग हैं एक ऐसे लोग जो अपनी प्रमाणिकता का पुरस्कार और प्रशंसा पाने का मौका नहीं गवाते।

और ऐसे लोग भी है जो दूसरों को पुरस्कृत करते हैं।

लेकिन हमारे जीवन में प्रामाणिकता का कोई पुरस्कार नहीं होता।

प्रमाणिकता अमूल्य है, प्रामाणिकता और इमानदारी अपने आप में ही एक बहुत बड़ा पुरस्कार है। ऐसे मौके पर अपने आप को कंट्रोल करना एक बहुत बड़ी चैलेंज होती है।

अपने अंतरात्मा में झांकने का अवसर जिंदगी में हमें कभी कभी ही मिलता है। हमें ऐसे सुनहरे अवसर को गवाना नहीं चाहिए लेकिन ऐसे अवसर को उत्सव में बदल देना चाहिए।

Remember:Honesty is such a lonely word

Everyone is so untrue

Honesty is hardly ever heard

And mostly what I need from you.

Motivational story in hindi about life part-4

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inspirational stories in hindi for success-part 5




 

 

http://www.marcandangel.com/2013/05/21/4-short-stories-change-the-way-you-think

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