Motivational story in hindi for success-part 1

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Motivational story in hindi for success
Motivational story in hindi for success

Motivational story in hindi for success     Story-1

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                      motivational story in hindi for success

एक शाला में शिक्षक ने अपने विद्यार्थियों को एक बात सुनाई और बोले

एक वक्त की बात है कि एक वक्त एक जहाज की दुर्घटना हो गई

 

जहाज में पति-पत्नी सवार थे |

पति पत्नी ने देखा के जहाज पर एक लाइफ बोट है उनमें एक ही व्यक्ति का समावेश हो सकता है|

 

थोड़ी देर सोचने के बाद उस आदमी ने अपनी पत्नी को नीचे धक्का दे दिया और खुद लाइफ बोट पर जाकर बैठ गया|

 

पत्नी जोर से कुछ बोली

 

शिक्षक ने विद्यार्थियों से पूछा तुम अनुमान लगाओ कि वह जोर से क्या बोली होगी?

 

बहुत से विद्यार्थियों ने कहा उसने कहा होगा तुम क्रूर हो मैंने तुमसे अंधा प्यार किया तुमने मुझे धोखा दिया

 

सभी शिक्षक ने देखा कि एक विद्यार्थी चुपचाप बैठा है और कुछ सोच रहा है

 

शिक्षक ने उसे बुलाया और कहा अब तुम  ही बताओ उसने चिल्लाकर क्या कहा होगा

 

विद्यार्थी बोला उसने कहा होगा के हमारे बच्चों का ध्यान रखना

अब शिक्षक को आश्चर्य हुआ और बोले तुमने यह बात कभी भी पहले सुनी है क्या?

 

बच्चे ने थोड़ी देर सोच कर जवाब दिया नहीं

 

लेकिन मेरी मां ने मरने के वक्त मेरे पिताजी को यही बात कही थी

तेरा उत्तर बिल्कुल सही है।

 

फिर जहाज डूब गया और वह आदमी अपने घर गया

 

अपनी भोली भाली बच्ची का पालन पोषण कर उसकी परवरिश की

कई साल के बाद उस आदमी की मौत हो गई तो उस लड़की को घर में से अपने पिता की एक डायरी मिली उसमें लिखा था कि

 

जब वह जहाज पर गए तब से उन्हें पता था कि उसकी पत्नी को एक गंभीर बीमारी है और उसके बचने की संभावना ना के बराबर है

बावजूद उसने उसको बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए

इस उम्मीद से कि वह ठीक हो जाए लेकिन ऐसा हो ना सका और दुर्घटना हो गई

 

वह भी उसके साथ समंदर की गहराइयों में मर जाना चाहता था

 

लेकिन सिर्फ अपनी बच्ची के लिए भारी हृदयसे उसने पत्नी को समंदर में डूब जाने को अकेला ही छोड़ दिया।

 

बात पूरी हो गई पूरे क्लास में सन्नाटा सा छा गया।

 

शिक्षक समझ चुके थे कि विद्यार्थियों को कहानी पूरी तरह समझ में आ चुकी है

Moral of story-

संसार में अच्छा और बुरा दोनों है

 

लेकिन दोनों को समझने में बहुत कठिनाई आती है

 

क्योंकि यह सब परिस्थितियों पर आधारित है उसे समझने में थोड़ी कठिनाई आती है।

 

अतः हमें जो दिखाई देता हो उस पर बिना सोचे हमें अपनी राय नहीं देनी चाहिए पहले बात को पूरी तरह समझ लेना जरूरी है

 

अगर कोई अपना हाथ मदद के लिए आगे बढ़ाएं तो ऐसा नहीं कि वह उपकार कर रहा है लेकिन वह दोस्ती का मूल्य समझता है।

 

कोई अपना काम पूरी निष्ठा से करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह डर कर करता है

लेकिन मतलब यह है कि उसे परिश्रम का महत्व समझ में आता है और वह देश की उन्नति में अपना योगदान देता है|

 

अगर कोई आपको किसी भी प्रकार की मदद करने को आतुर है तो उसका मतलब यह तो नहीं कि वह फालतू है

और आपसे कुछ बदले की भावना है।

इसका मतलब यह है कि वह अपना एक मित्र खोना नहीं चाहता।

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Motivational story in hindi 

 inspirational hindi Story-2

एक नगर में एक शांत औरत रहती थी। एक समय की बात है वह उसके पुत्र के साथ शाम को बाज़ार जा रही थी।

उसी वक्त एक पागल महिला दोनों के सामने आ गई और उस लड़के की मां को भला बुरा कहने  लगी।

उस औरत ने बहुत भला बुरा कहा लेकिन इस महिला की बातों का मां पर मानो कोई असर ही नही और वह मंद मंद मुस्कान के साथ आगे बढ़ी।

पागल औरत अचंबित रह गई उसने सोचा इस पर तो कोई असर ही नहीं है।

उसने और ज्यादा बुरा भला बोलने की ठान ली। अब वो पहले से ज्यादा उन्माद में क्रोधित होकर उसके पति और पूरे परिवार के लिए मन में जो आए वह कहने लगी।

लड़की की मां बस सुनती गई। काफी देर तक यह तमाशा चला कोई प्रतिक्रिया न मिलने पर पागल औरत वहां से चलती बनी।

जब वो चली गई तब बेटे ने अपनी मां को पूछा  मां उस औरत ने इतनी गालियां दी पिताजी और हमारे परिवार के लिए बुरी बातें कहीं और आप बस सुनती रही?

वह बोलती रही और आप सुनती रही और मन मन मुस्कुराती भी रही क्या आपको उनकी बातों से जरा भी दुख नहीं हुआ?

मां कुछ ना बोली सिर्फ बेटे को चुपचाप अपने साथ चलने को कहा। घर पर पहुंचने पर मैंने कहा तुम यहां ठहरो मैं अभी आई।

थोड़ी देर के बाद मैं अपने रूम में से कुछ गंदे कपड़े ले आई और बेटे को बोले यह लो तुम अपने कपड़े बदल लो।

बेटा बोला मां ये तो बहुत मैले  हैं। I इसमें तो बदबू आ रही है। बेटे ने उन कपड़ों को तिरस्कार से फेंक दिया।

अब मां ने बेटे को बड़े प्यार से कहा कोई तुमसे बेमतलब भिड जाता है और कुछ भी बोल देता है

तब उसके गंदे शब्दों का असर हमें अपने निर्मल मन पर कभी भी नहीं होने देना चाहिए।

हम भी उसके साथ ऐसा बर्ताव करेंगे तो हमने और उन में फर्क ही क्या रह गया?

किसी की फेंकी हुई गंदगी को अपने मन में बसा के हम अपना मन क्यों खराब करें? और जिसके शब्दों का कोई मूल्य ही नहीं है उसके पीछे हम अपना कीमती समय क्यों बर्बाद करें?

 

 

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Motivational story in hindi for success  

 

 inspiring hindi Story-3

एक समय की बात है। एक महाराजा ने गांव के विद्वानों की एक सभा बुलाई और उनसे सवाल किया।

मेरे जन्माक्षर के मुताबिक मेरे नसीब में राजा बनने का लिखा था परंतु उसी समय अनेक लोगों ने जन्म लिया तो वे राजा क्यों नहीं बन सके? मैं समझना चाहता हूं।

इस सवाल का किसी के पास कोई जवाब नहीं था।

वहां पर एक बूढ़ा आदमी खड़ा हुआ और उसने कहा महाराज एक काम कीजिए यहां से एक घनघोर जंगल में आपको एक संत पुरुष मिलेंगे वह आपके सवाल का बिल्कुल सही जवाब दे सकते हैं।

राजा बहुत जल्दी से घनघोर जंगल में पहुंचा वहां पहुंच कर उसने देखा कि एक सिद्ध पुरुष वहां अंगार खा रहे थे।

राजा के प्रश्न पूछने पर उसने क्रोध से कहा तेरे सवाल का जवाब आगे इन पर्वतों के पीछे कई सालों से एक् संत पुरुष रहते हैं वह बदला सकते हैं।

राजा की सवाल का जवाब जानने की उत्तेजना बढ़ गई कई कठिन मार्गो को पार करके राजा वे संत  पुरुष के पास पहुंचा।

वहां का दृश्य देखकर राजा की आंखें फटी की फटी रह गई। वे संत अपने शरीर के मांस को  चिमटे से नोच नोच कर खा रहे थे।

राजा के  सवाल पूछने पर संत ने क्रोधित होते हुए कहा मैं भूख से आकुल व्याकुल हूं मेरे पास वक्त नहीं है।

आगे गांव में एक बच्चे का जन्म होने वाला है और वह बच्चा थोड़ी ही देर जीवित रहेगा वह बच्चा तेरे सवाल का जवाब दे सकता है।

अब राजा बहुत उलझन में पड़ गया।

बड़ी कमाल की घटना उसके साथ घट रही थी। राजा फिर से कठिनाइयों को पार करके सामने वाले गांव जा पहुंचा।

बच्चे के जन्म के साथ ही उन्होंने उस बच्चे को राजा के हाथों में थमा दिया।

राजा के सामने बच्चा खिलखिला कर हंस ने लगा और उसने कहा राजा समय तो मेरे पास भी नहीं है लेकिन अपने सवाल का जवाब सुन लो-

आप मैं और दोनों संत पुरुष सात जन्म पहले चारों भाई राजकुमार थे।

एक बार एक जंगल में शिकार करने के लिए हम 3 दिन तक बिना खाए पिए भटकते रहे। अचानक हम चारों को आटे की एक पोटली मिली।

हम सब ने मिलकर उसकी चार रोटी सेकी और अपनी अपनी रोटी खाने बैठ गए। अभी खाना शुरू ही किया था कि भूख प्यास से आकुल व्याकुल एक् संत पुरुष वहा पर आए।

अंगार खाने वाले से  उसने कहा। बच्चा मैंने कई दिनों से कुछ नहीं खाया अपनी रोटी मुझे दे दे मुझ पर रहम कर।

अब भूख मुझसे सही नहीं जाती मैं भूख के मारे मर जाऊंगा। इतना सुनते ही उसको क्रोध आ गया और उसने कहा मैं तुम्हें क्यों दूं भला मुझे भी जोरों की भूख लगी है। चल फुट यहां से…..

फिर वह संत पुरुष मांस खाने वाले भैया के पास गए और उन से विनती की लेकिन उसने भी संत पुरुष का अपमान किया और कह दिया कि-

बड़ी कठिनाई से मिली यह रोटी मैं तुम्हें क्यों दूं फिर क्या मैं अपने शरीर का मांस नोच कर खाऊंगा?

भूख से तड़पते संत पुरुष मेरे पास आए और मुझसे रोटी मांगी किंतु मैंने भी निर्दयी होकर बोल दिया निकलो यहां से मैं क्या भूखा मरु?

अब उनकी अंतिम आशा आप थे राजा। आपके पास आकर वे गिड़गिड़ाए। आपको उस पर तरस आ गया और आपने अपनी रोटी में से आधी रोटी उन संत पुरुष को दे दी।

रोटी पाकर संत प्रसन्न हुए और उसने कहा। तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्म के अनुसार लिखा जाएगा।

बच्चे ने कहा इस प्रकार हम सब लोग अपने अपने कर्मों का फल भोग रहे है। इतना कहते ही बच्चा मर गया।

Moral: जैसी करनी वैसी भरनी। हमें अपने अच्छे कर्मों का अच्छा फल मिलता है और बुरे कर्मों का बुरा।

पासवर्ड यदि गलत हो तो कुछ भी नहीं खुलता तो सोचो हमारे गलत कर्मों से स्वर्ग के दरवाजे हमारे लिए कैसे खुलेंग?

motivational story in hindi for success

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 best motivational hindi Story-4

एक विद्यार्थी को कड़ी मेहनत के बावजूद सफलता नसीब नहीं हुई।

वह हिम्मत हार गया, उम्मीद की कोई किरण उनके जीवन में नहीं रही, बुरे ख्यालों से वह बेचैन हो गया। जब कोई उपाय न सूजा तो उसने सुसाइड करने का निश्चय किया।

जब वे  एक जंगल में गया और सुसाइड का प्रयत्न कर रहा था तभी अचानक एक महात्मा ने उसे देखा।

महात्मा ने कहा बालक ऐसी भी क्या बात है और तुम यहां इस जंगल में अकेले?

तब उसने कहा मैं अपनी जिंदगी में कड़ी मेहनत कर चुका हूं लेकिन उसका कोई परिणाम ना मिलने से मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं ,अब मेरे जीने की कोई वजह नहीं।

महात्मा ने उनसे सवाल किया कितने समय से तुम कड़ी मेहनत कर रहे हो?

विद्यार्थी बोला करीब 2 साल बीत चुके है, मैं परीक्षा में असफल हुआ हूं,

और मुझे कहीं जॉब भी नहीं मिल रही,

महात्मा हस पड़े- अरे बेटे तुम्हे सब कुछ मिल जाएगा। थोड़ी और मेहनत करो बस कुछ ही दिन…..

विद्यार्थी ने कहा- मैं किसी के लायक नहीं हूं। मुजसे क्या होगा?

जब महात्मा ने गौर किया कि विद्यार्थी बिल्कुल नासीपास हो गया है तो उन्होंने कहा-

एक समय की बात है भगवान ने 2 पौधे लगाए,

एक पौधा बांस का और दूसरा furn का ।

Furn वाला पौधा जल्दी से बड़ा हो गया लेकिन बांस का पौधा ज्यों का त्यों रहा।

भगवान हिम्मत नहीं हारे। दूसरा साल भी ऐसे ही बिता।Furn

का पौधा बहुत बड़ा हो गया। फिर भी भगवान हिम्मत नहीं हारे।

थोड़े दिन बीत जाने पर बांस के पौधे में अंकुर फूटे और बांस का पेड़ आसमान छूने लगा।

बांस के पेड़ को अपनी जड़े ज्यादा ताकतवर करने में थोड़े साल लग गए।

महात्मा ने विद्यार्थी से कहा- यह आपका कड़ी मेहनत का समय, अपनी जड़े मजबूत करने के लिए है।

आप इस समय को अमूल्य समझे। जैसे ही आप की जड़े मजबूत हो जाएगी आप आसमान को छूने लगोगे।

बांस  ने अपनी तुलना furn से नहीं की। क्योंकि बांस को मालूम है

की फर्न की जड़े बहुत कमजोर होती है। जरा सा तूफान आने पर उखड़ जाएगी। लेकिन अपनी जड़े इतनी मजबूत है कि बड़ा सा बड़ा तूफ़ान भी उसे डगमगा नहीं सकता।

इसलिए विद्यार्थियों जीवन में कभी भी संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए। कड़ी से कड़ी मेहनत करके अपनी जड़ों को इतना स्ट्रांग बना ले के बड़े से बड़ा तूफान आपके फौलादी इरादों को कभी भी कमजोर ना कर सके।

 

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